पहले भृत्य
ने की अधीक्षिका की पुलिस से शिकायत
अनूपरपु। अनुसूचित जाति कन्या
छात्रावास इन दिनो अधीक्षिका और भृत्य एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा
है और इस सब में छात्रावास का छात्राएं को अधीक्षिका अपने बचाव में उपयोग किया जा
रहा है। 3
फरवरी को छात्रावास में बिजली दुर्घटना के बाद 5 फरवरी को छात्राओ द्वारा अधीक्षिका के
बचाव में जनसुनवाई में भृत्य द्रोपती रजक की शिकायत करना यह सब किसी और कि तरफ
मामले के लक जाने की कोशिश है।

नगर में
संचालित अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास क्रमंाक २ की आधा दर्जन छात्राएं अपनी
वार्डन की समर्थन में उन्हें निर्देश बताते हुए शिकायती पत्र में अपने ही
छात्रावास की महिला भृत्य के चरित्र पर गलत आरोप लगाई। यहीं नहीं छात्राओं ने 26 जनवरी को छात्रावास
अधीक्षिका द्वारा भृत्य द्रोपती रजक की पिटाई को झूठा बताते हुए 5 फरवरी को छात्रावास
में कुछ पत्रकारों को बुलाकर द्रोपती रजक द्वारा अधीक्षिका के खिलाफ झूठी शिकायत
कर छात्रावास की छात्राओं को डरा-धमकाकर फर्जी हस्ताक्षर कराने की बात कही। इस
दौरान कलेक्टर ने घटना की पूरी जानकारी चाही तो छात्राओं ने सम्भावनाओं के आधार पर
आधी-अधूरी जानकारी दी। जिस पर कलेक्टर ने छात्राओं पर नाराजगी जताते हुए वहां
मौजूद आदिवासी विभाग से मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
ज्ञात हो कि 26 जनवरी को भृत्य
द्रोपती रजक ने अधीक्षिका के विरूध पिटाई किए जाने के सम्बंध में कोतवाली थाना में
शिकायत दर्ज कराई थी। इसी दौरान 4
फरवरी की रात को कन्या छात्रावास में रात की ड्यूटी के दौरान तैनात भृत्य
सुमित्राबाई बारी के बिजली शॉटसर्किट में घायल की घटना में भी सूचना पर अधीक्षिका
ने उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती नहीं कराया था। जिसमें लगातार दो मामले
सामने पर 6
फरवरी को अधीक्षिका को निर्र्दाेष साबित करने छात्रावास की आधा दर्जन छात्राएं
बिना छात्रावास अधीक्षिका की अनुमति दोपहर 12.30
बजे कलेक्ट्रेट जनसुनवाई पहुंच गई। मामले में सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग पीएन
चतुर्वेदी ने भी वार्डन और भृत्य के मामले में बिना अनुमति और किसी संरक्षक के
बिना कलेक्ट्रेट पहुंचने पर आपत्ति जताई।
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