अनूपपुर। एक
पुत्र द्वारा अपने बुजुर्ग माता-पिता को उनके ही मकान से सम्पत्ति हडपने के इरादे
से घर से बाहर निकाल दिया था। पुत्र की प्रता$डना
से परेशान होकर दंपत्ति को किराये के मकान में अभावों के बीच रहने की मजबूरी आ गई।
तब बुजुर्ग दम्पत्ति ने अपने मकान को फिर से प्राप्त करने के लिये न्यायालय की शरण
ली। शनिवार को आयोजित लोक अदालत में यह प्रकरण खण्डपीठ क्रमांक चार में रखा गया
था। जहां दोनों पक्षों की उपस्थिति में न्यायाधीश वारिन्द्र कुमार तिवारी न्यायिक
मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने आवेदिका का अनावेदक के मध्य अधिवक्ता पुष्पेन्द्र
मिश्रा की मौजूदगी में मकान को लेकर चल रहे इस घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण
अधिनियम २००५ से जु$डे
इस मामले पर सुलह कराई। अपने खुद के घर से हटाये बुजुर्ग दम्पत्ति के पक्ष में
न्यायाधीश द्वारा फैसला दिलाया गया, जिसपर
दम्पत्ति के पुत्र ने भी अपनी गलती मानी और बुजुर्ग माता-पिता को घर वापस कराया।
मामले में अधिवक्ता सुधा शर्मा द्वारा बताया गया कि लीला बाई ६८ वर्ष पत्नि
चंदूलाल हरिजन निवासी अनूपपुर वार्ड क्रमांक ०९ के पक्ष में यह फैसला आया, जिसमें इनकी शिकायत
थी कि ग्राम सामतपुर में खरीदा हुआ उनका मकान है। पुत्र आनंद कोरजा कालरी में
पत्नि के साथ रह रहा था। लीला बाई ने बताया कि अनूपपुर में हम दोनों पति-पत्नि रह
रहे थे, पुत्र
के मन में बेईमानी आई और बहू को अनूपपुर रहने के लिये भेज दिया। धीरे-धीरे हम
दोनों को प्रताणित किया जाने लगा। परेशान होकर अपने जीवन की सुरक्षा को लेकर
अनूपपुर में ही किराये के मकान में रहने को विवश हो गये। उनके मकान पर पुत्र
द्वारा कब्जा कर लिया गया और धमकी दी गई कि वापस घर में कदम मत रखना, किराये के मकान में
रहने के दौरान दोनों बुजुर्ग दम्पत्ति को अपना भरण पोषण करना कठिन होने लगा। मकान
का किराया देना भी मुश्किल हो गया। तब हालात को देखते हुए लीला बाई ने अपने घर को
प्राप्त करने न्यायालय की शरण ली। जहां अधिवक्ता सुधा शर्मा के माध्यम से प्रकरण
के आवेदिका लीला बाई के आवेदन पर न्यायाधीश वारिन्द्र कुमार तिवारी ने लोक अदालत
में आवेदिका के पक्ष में निर्णय दिया। अनावेदक आनंद कुमार को आवेदिका का आवास वापस
किये जाने के निर्देश दिये गये।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें