अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (अमरकंटक) एक बार फिर विवादों में है। पेसा एक्ट से जुड़ी परियोजना में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर आदिवासी युवा छात्र महासंघ (आयाम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश कुमार मरावी ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में 15 जुलाई को प्रस्तावित कार्य परिषद (एक्जीक्यूटिव काउंसिल) की बैठक के एजेंडा में इस पूरे मामले को शामिल करने, स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने तथा जांच पूरी होने तक पेसा परियोजना के अंतर्गत हाल ही में हुई भर्ती प्रक्रिया का परिणाम जारी नहीं करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पेसा परियोजना के लिए स्वीकृत सरकारी राशि का उपयोग परियोजना के निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में किया गया। संगठन ने यह भी दावा किया है कि पेसा फंड का उपयोग प्रधानमंत्री एवं भारत सरकार के खिलाफ दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन में किया जा रहा हैं।
आयाम द्वारा सौंपे गए 15 बिंदुओं वाले ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पंचायत राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुसंधान, प्रशिक्षण और जनजातीय विकास संबंधी गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराई गई राशि के उपयोग में गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं। संगठन ने निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
राष्ट्रीय आयोग और मंत्रालय में पहले से शिकायत
ज्ञापन के अनुसार, इस मामले की शिकायत पूर्व में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, पंचायत राज मंत्रालय तथा अन्य सक्षम संस्थाओं को भी भेजी जा चुकी है। संगठन का दावा है कि मामला संबंधित संस्थाओं के संज्ञान में है और विभिन्न स्तरों पर जांच की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कार्य परिषद को भी इस प्रकरण पर गंभीरता से विचार कर स्वतंत्र जांच समिति गठित करनी चाहिए।
आयोग के नोटिसों की अनदेखी का आरोप
आयाम ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा जारी नोटिसों का समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। संगठन का कहना है कि यदि किसी संवैधानिक संस्था के निर्देशों की उपेक्षा हुई है तो यह स्वयं एक गंभीर प्रशासनिक विषय है और इसकी भी अलग से जांच होनी चाहिए।
पेसा फंड के उपयोग पर सवाल
संगठन ने आरोप लगाया कि पेसा परियोजना के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं किया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि परियोजना से असंबंधित कुछ गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में भी इस फंड का उपयोग हुआ। आयाम ने परियोजना से जुड़े सभी वित्तीय व्यय, प्रशासनिक स्वीकृतियों, भुगतान और कार्यक्रमों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
भर्ती प्रक्रिया पर भी आपत्ति
ज्ञापन में 9 जुलाई 2026 को आयोजित रिसर्च असिस्टेंट एवं फील्ड इन्वेस्टिगेटर पदों के लिए हुए वॉक-इन-इंटरव्यू का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि जिस परियोजना के वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों की जांच चल रही हो, उसके अंतर्गत नई नियुक्तियों का परिणाम जारी करना भविष्य में प्रशासनिक एवं कानूनी विवाद उत्पन्न कर सकता है। इसलिए जांच पूरी होने तक भर्ती परिणाम स्थगित रखने की मांग की गई है।
25 कानूनी एवं प्रशासनिक बिंदुओं का उल्लेख
आयाम ने अपने ज्ञापन में पूर्व में भेजे गए पत्रों का हवाला देते हुए भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लगभग 25 कानूनी एवं प्रशासनिक बिंदुओं का उल्लेख किया है। इनमें विज्ञापन प्रक्रिया, चयन प्रक्रिया, आरक्षण नियमों के पालन, प्रशासनिक स्वीकृतियों तथा सेवा नियमों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। संगठन का दावा है कि इन मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णय भी लागू होते हैं।
पूर्व की घटनाओं का भी जिक्र
ज्ञापन में 15 नवंबर 2025 को विश्वविद्यालय परिसर में हुई घटना तथा उससे संबंधित दर्ज एफआईआर का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि यदि पूरे घटनाक्रम को पेसा परियोजना से जुड़े आरोपों के साथ समग्र रूप से देखा जाए तो मामले की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
पारदर्शी निर्णय की मांग
आयाम ने कार्य परिषद के सदस्यों से विश्वविद्यालय की साख, जनजातीय समाज के हितों और संस्थागत पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मामले को 15 जुलाई की बैठक के एजेंडा में शामिल करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि निष्पक्ष जांच और पारदर्शी निर्णय ही विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता को मजबूत कर सकते हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में प्रशासनिक एवं कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इस संबंध में अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने कहा कि मुझे सभी मामलों की जानकारी है बुधवार को विश्वविद्यालय में पूरा दिन रहकर हर चीज की बारीकी से समीक्षा की जाएगी दोषी व्यक्तियों पर कार्यवाही की जाएगी।













































