राजेश शुक्ला
अनूपपुर। विकास लिये जरूरी है
अधोसंरचना का होना जब इसमे रसूकदार लोग बाधक बने तो फिर विकाश की बात बेमानी होगी।
प्रशासन नगर के विकाश के लिये परेशान है खासकर फलाईओवर को लेकर इसके बनने को लेकर
लोगो व्दारा कई अडचने खडी की गई,किन्तु
जब पुराने दस्ताबेज देखा गया तो असलियत सामने आई जिस भूमि का मुवावजा मांगा जा रहा
है वह अतिक्रमण में है, वर्ष
१९६२ के भू-अभिलेख नक्शा के अनुसार शासन द्वारा इंदिरा तिराहा से रेलवे फाटक तक
लगभग ७.५ एकड़ जमीन स्वास्थ्य विभाग के लिए आरक्षित है। ढाई एकड़ जमीन पर जिला चित्सिालय परिसर
सहित स्वसहायता भवन व अन्य शासकीय इमारतें खड़ी है। नक्शे के अनुसार स्वास्थ्य
विभाग के लिए आवंटित ७.५ एकड़ जमीन कहां गुम है। यह यक्ष प्रश्र अधिकारिये के कान
खडे कर दिये है।
जिला
चिकित्सालय के निमार्ण के लिये जहां शासन प्रशासन परेशान है और जहा भूमि अधिग्रहण
के किया जा रहा है वहा किसानो अपनी मांगो को लेकर नित नये आन्दोलन कर प्रशासन को
चुनौती दे रहे वही प्रशासन को अभी तक यह भान नही था कि जिला चिकित्सालय के पास
अपनी भूमी है बस उसे अतिक्रमण मुक्त कराना है। भू-अर्जन तथा राजस्व विभाग द्वारा
सीमांकन और नामांतरण करने बरती गई लापरवाही वर्तमान में शासन और प्रशासन की मुसीबत
बन गई है। जहां सीमांकन और नामांतरण के अभाव में भू-अर्जित जमीनें आज भी किसानों
की निजी सम्पत्ति बनी हुई है। ऐसी ही कुछ समस्याओं वर्तमान जिला चिकित्सालय
अनूपपुर जूझ रहा है, जहां
जिला अस्पताल अपनी जरूरतों के नवनिर्माण के लिए जमीनें तलाश रहा है। यहीं नहीं
पूरी व्यवस्थाओं के साथ अस्पताल संचालन के लिए प्रशासन अमरकंटक मार्ग स्थित
सीएमएचओ कार्यालय के सामने १७ एकड़ जमीन पर नए अस्पताल भवन निर्माण की प्रक्रिया
में जुटा हुआ। लेकिन वर्ष १९६२ के भू-अभिलेख नक्शा के अनुसार शासन द्वारा इंदिरा
तिराहा से रेलवे फाटक तक लगभग ७.५ एकड़ जमीन स्वास्थ्य विभाग के लिए आरक्षित बताई
जा रही है। बावजूद वर्तमान में लगभग ढाई एकड़ जमीन अवशेष पर जिला अस्पताल परिसर
सहित स्वसहायता भवन व अन्य शासकीय इमारतें खड़ी है। नक्शा के अनुसार स्वास्थ्य
विभाग के लिए आवंटित ७.५ एकड़ जमीन कहां गुम है यह अस्पताल प्रशासन को भी नहीं पता
और ना ही राजस्व विभाग को। पत्रिका पड़ताल में पीडब्ल्यूडी तकनीकि शाखा विभाग के
अनुसार वर्ष १९६२ के भू-अभिलेख नक्शे के अनुसार अनूपपुर के इंदिरा तिराहा से रेलवे
फाटक तक शासन के राजस्व भू-भाग में स्वास्थ्य केन्द्र के लिए ७.५ एकड़ दर्शाया गया
है। अनूपपुर के राजस्व विभाग का कोई भी रिकार्ड और नक्शा नहीं होने पर वर्ष २०१०
के तत्कालीन कलेक्टर कवीन्द्र किवायत के निर्देश पर भू- अभिलेख नक्शा बनाने की कार्रवाई
की गई। जिसमें शहडोल निवासी कुंवर गम्भीर सिंह के पास उपलब्ध वर्ष १९६२ से पूर्व
के नक्शे के आधार पर वर्तमान राजस्व अनूपपुर का नक्शा तैयार कर प्रशासन को सौंपा
गया, जो
वर्तमान में भू-अभिलेख विभाग के पास उपलब्ध होगा। विभाग का कहना था कि इसी नक्शे
को डिजिटल किया जाना प्रस्तावित था।
वहीं
पीडब्ल्यूडी विभाग का मानना है कि वर्तमान में जिला अस्पताल परिसर लगभग ढाई एकड़
जमीन में शेष बची है, आसपास
के लगभग जमीनें अतिक्रमण की चपेट में सिमट गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्ष
१९६२ के दौरान ही धनपुरी से अनूपपुर के दर्रीखैरवा (सकरा मोड़ अमरकंटक मार्ग) से
वेंकटनगर तक लगभग ७० किलोमीटर लम्बी सड़क का भू-अर्जन किया गया था। जिसमें हजारों
किसानों की जमीनें प्रशासन द्वारा तत्कालीन दरों पर अधिग्रहित की गई थी। लेकिन
पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा अधिग्रहित भू-अर्जन में वर्ष २०१७ तक किसानों के नामों
का नामांतरण और सीमांकन का कार्य जारी रखा।
एक ओर जहां
जिला अस्पताल की जमीन अतिक्रमण में समा गई है,
वहीं प्रशासन द्वारा वर्ष २००८ में सीएमएचओ कार्यालय के पास
अधिग्रहित १६ एकड़ जमीन पर किसानों का विरोध उतर आया है। हालांकि शासन द्वारा
भू-अर्जित की गई जमीनों का मुआवजा प्रदाय किए जाने की बात कह रही है। वहीं किसानों
का तर्क है कि जो जमीन शासन द्वारा अधिग्रहित की गई है उसमें करारनामों के तहत
लाभांश नहीं मिला। जिसके कारण विवादों में जमीन के उलझने से प्रस्तावित १००
बिस्तरों के सुपर होस्पिटिली सेंटर का निर्माण अधर में अटक गया है। फिलहाल प्रशासन
जिला अस्पताल के ७.५ एकड़ जमीन की खोजबीन में जुट गई है।
इनका कहना है
अभी मुझे
जानकारी नही है मै जानकारी ले कर बताता हूँ
अजय शर्मा
कलेक्टर अनूपपुर
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