सभी को
समानता का हक देने पर जोर
अनूपपुर।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकटंक में डॉ. अंबेडकर चेयर के तत्वावधान में
डॉ.बी.आर.अंबेडकर जयंती के अवसर पर ११ दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। १४
अप्रैल तक अनवरत रूप से चलने वाले इन कार्यक्रमों के अंतर्गत विशेष व्याख्यान, निबंध लेखन, क्विज प्रतियोगिता, डॉ.अंबेडकर की
विचारधारा पर राष्ट्रीय सेमीनार और भारतीय संविधान पर विशेष सिंपोजियम आयोजित किया
जा रहा है। इस अवसर पर छात्रों को फिल्म
और डाक्यूमेंट्री के माध्यम से डॉ. अंबेडकर की विचारधारा के बारे में जानकारी
प्रदान करते हुए उन्हें लिंग, जाति
और जनजातीय व्यवस्था के आधार पर होने वाले भेदभाव के बारे में जागरूक किया जाएगा।
एशियन ह्यूमन राइट्स कमीशन, हांगकांग
के अविनाश पांडे ने विगत दिवस रि-थिकिंग राइट्स ऑफ द मार्जिनलाइज्ड
कम्युनिटीज-कंटेपररी रेलीवेंस ऑफ डॉ.अंबेडकर एंड महात्मा ज्योतिबा फुले पर विशेष
व्याख्यान दिया। उन्होंने समाज में जातिवाद के पूर्ण रूपेण व्यवस्था का हिस्सा बन
जाने के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए १९वीं शताब्दी में धार्मिक आंदोलनों
के साथ होने वाले जाति विरोधी आंदोलनों के बारे बताया। उनका कहना था कि आधुनिक
समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबाफुले ने जातीवादी विरोधी आंदोलनों की अगुआई की जिसे
डॉ.बी.आर.अंबेडकर ने अधिकारों और समानता के आंदोलन के रूप में निर्णायक मोड़ तक
पहुंचाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में सरकार का दायित्व है कि वह समाज में
समानता का अधिकार प्रदान करे। डॉ.अंबेडकर चेयर के चेयरमेन प्रो. किशोर गायकवाड़ ने
जाति आधारित व्यवस्था के भारत में आर्थिक,राजनीतिक, धार्मिक और
सांस्कृतिक जीवन के सभी क्षेत्रों में प्राथमिकता ग्रहण करने के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि गांवों से बड़े शहरों में पलायन के बाद भी जातीवादी व्यवस्था ही
भारतीय समाज में पहचान का मुख्य बिंदु है। ब$डे
शहर भी जाति आधारित छोटे भागों में बंटे हुए दिखाए देते हैं। आधुनिक परिवेश में भी
जातिवाद विरोधी विचारों को रखना मुश्किल बना हुआ है। कार्यक्रम का संचालन रोहित
बोरलिकर ने किया।
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