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मंगलवार, 3 अप्रैल 2018

श्वास पर नियंत्रण कर मस्तिष्क और विचारों पर नियंत्रण किया जा सकता है-आर.एन. मेरानी

विशेषज्ञ ने बताए मानसिक शक्ति बढाने के गुर
अनूपपुर श्वास क्रिया के माध्यम से खुद में ऊर्जा संचारित करने और मन पर नियंत्रण रखने के बारे में प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकटंक में सोमवार को विशेष व्याख्यान श्री श्री रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम ट्रस्ट, बंग्लौर के ट्रस्टी एयर कमोडोर (रिटा.) आर.एन. मेरानी ने स्वयं की मानसिक शक्ति को बढऩे के लिए प्रणायाम की विधि बताई। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने कहा कि जीवन में श्वास का अत्याधिक महत्व है। इसी के माध्यम से वार्तालाप संभव है। शोध ने सिद्घ किया है कि एक व्यक्ति अपने फेफड़ों का सिर्फ 30 से 35 प्रतिशत ही उपयोग करता है जबकि बच्चा 80 से 90 प्रतिशत तक उपयोग करता है जिससे उसमें ऊर्जा का स्तर भी काफी अधिक होता है। उन्होंने कहा कि श्वास पर नियंत्रण करके अपने मस्तिष्क और विचारों पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है जिससे ऊर्जा को संरक्षित करने में मदद मिलती है। शोध ने सिद्घ किया है कि श्वास मस्तिष्क की शांति और वाह्य वातावरण के बीच का माध्यम है। मस्तिष्क सदैव पूर्व की घटनाओं और भविष्य के बीच में घूमता है जबकि जीवन वर्तमान को जीना है। इससे पूर्व के तनाव से मुक्ति मिल सकती है और भविष्य के दबाव को कम किया जा सकता है। इसमें श्वास और मस्तिष्क की विभिन्न क्रियाओं से स्वयं को ऊर्जीकृत किया जा सकता है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. टी.वी. कटटीमनी ने  ट्रस्ट के साथ मिलकर ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने ग्रामीण युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई और विश्वविद्यालय की ओर से इस संबंध में सकरात्मक प्रयास का आवश्वासन दिया। इससे पूर्व डीन प्रो.पी.के. सामल ने कार्यक्रम की जानकारी दी। व्याख्यान में बड़ी संख्या में शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया।


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