काव्यांजलि व प्रतिभा सम्मान सम्पन्न

इस अवसर पर श्रीमती खरे ने कहा कि
महिला की सबसे बड़ी बिडम्बना है कि वो पहचान की मोहताज रही है हमेशा मेने
इस बात के लिए अपने आप से ही एक वादा किया है कि हम अपनी पहचान खुद बनाने की हर
छोटी सी कोशिश करते रहेंगे। हमें हमारे नाम से भी लोग जाने बस इसी तरह एक ओर कदम
आगे बढाया ओर लोगों ने काफी सहयोग किया, सराहा भी। भोपाल के जाने माने कवियों के बीच
राष्ट्रीय अर्न्तराष्ट्रीय आर्वड प्राप्त कवियों के बीच अपनी प्रस्तुति दी।
उन्होने कुलश्रेष्ठ परिवार को बहुत बहुत बधाइयाँ देते हुए बाबूजी को सादर भावपूर्ण
श्रद्धांजलि अर्पित की।
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