
जल संसाधन विभाग की दिखी मनमानी
जानकारी के अनुसार संबंधित विभाग जल संसाधन से कार्य
प्रारंभ करने से पूर्व संबंधित एजेंसी द्वारा अनुमति मांगी गई थी, जहां विभाग द्वारा उक्त पुल
रपटा का कोई जिक्र नही किया गया और ना ही पुल की ऊंचाई बढाने संबंधी कोई लेख किया गया,
जिससे पानी रोक कर
इंटेक वेल का निर्माण तो कर दिया गया परंतु उक्त पुल के डूबने व आवागमन अवरूद्ध पर
किसी ने विचार नही किया। इस तरह शासन के लाखों रूपए की लागत से बना पुल अपना आस्तित्व
खो दिया और जिस ओर शासन प्रशासन द्वारा कोई पहल की जा रही है।
दुर्घटना का बना अंदेशा, मुक्तिधाम भी संकट में
राजेन्द्रग्राम मुख्यालय तक पहुंचने के लिए जहां कई ग्रामीण
क्षेत्रो के लोग बीते कई वर्षो से इसकी मार्ग से होकर आवागमन करते थे, वहीं इंटक वेल बनने से अचानक
पुल के ऊपर तक पानी भर जाने से यह मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया, वहीं पुल के ऊपर तक पानी
भर जाने के कारण जहां सड़क में न तो कोई सूचना पटल लगाया गया है और न ही कोई स्टॉपर
लगाया गया है, जिससे अप्रिय घटना का अंदेशा बना हुआ है। वहीं आवागमन अवरूद्ध होने पर राजेन्द्रग्राम
में बनाए गए मुक्तिधाम भी कैचमेंट एरिया में जल भराव होने से घाट का अस्तित्व भी खतरे
में पड गया है।
इनका कहना है
जल संसाधन विभाग द्वारा पुल को लेकर कोई मेंशन नही दिया
गया था हमारे पास कोई प्रोविजन भी नही है।
ए.के. जैन, मैनेजर किरगी जल प्रदाय समूह योजना
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