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सोमवार, 7 मई 2018

जोहिला नदी के बीच धुल रहे सैकड़ो वाहन, बारहमासी जोहिला अब सूखने के कगार पर

अनूपपुर राजेन्द्रग्राम सहित आसपास के सैकड़ों गांवों की जीवनदायिनी मानी जाने वाली एकमात्र जोहिला नदी अब अपने अस्तित्व बनाये रखने की लड़ाई लड़ रही है। बारह मास लोगों के दैनिक जीवन में मिठास घोलने के साथ किसानों के लिए वरदान बनी जोहिला का जल प्रशासनिक लापरवाही में अब विरल हो चली है। जलसंकट की समस्या तथा नदियों को सहेजने के आदेश के बाद भी प्रशासन के नाकों तले स्थानीय वाहन मालिकों ने जोहिला नदी को अपनी वाहनों धुलाई का सबसे सस्ता वाशिंग पिट बना दिया है, जहां दिनभर सैकड़ो की तादाद में भारी वाहनों के साथ साथ छोटे वाहन जोहिला के सीने पर उतर अपने कचरा, मलवा और ग्रीस ऑयल जैसे प्रदूषित रसायन छोड़े जा रहे है। जिसके कारण अमरकंटक से निकलकर उमरिया और बाद में सोननदी में समाहित होने वाली इस नदी की जलधारा अब सफेद की जगह काली दिखने लगी है। वहीं कचरे के पटाव के कारण नदी घाटों से दूर होती जा रही है। जबकि अमरकंटक से नीचे उतरती जोहिला में जगह जगह किसानों ने अपनी सुविधा के अनुसार बोरीबंधान कर इसके धार के अस्तिव को ही समाप्त कर दिया है। जहां सालों भर कल-कल रूप में बहती बारहमासी जोहिला अब गर्मी के दिनों में सामान्य नदियों की भांति सूख रही है। बावजूद प्रशासन की उदासीनता बरकार बनी हुई है। आश्चर्य की बात है कि राजेन्द्रग्राम मुख्यालय से चंद मीटर की दूरी पर बहती जाहिला की मझधार में सैकड़ो भारी वाहन दिन के उजाले में उतार उनकी धुलाई की जा रही है और ये सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है। लेकिन जोहिला बचाने न तो प्रदूषण विभाग और ना ही जिला प्रशाासन के अधिकारियों द्वारा कोई पहल की जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर जोहिला की धार सूखी तो इससे राजेन्द्रग्राम सहित आसपास के सैकड़ों गांवों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी। उनके अनुसार एक समय जोहिला के पानी को पीकर राजेन्द्रग्राम वासी अपना जीवन यापन कर रहे थे। वहीं किसानों के खेती सिचाई के लिए यही एक मात्र नदी साधन के रूप में उपलब्ध थी। इसे देखते हुए पूर्वमंत्री रहे स्व. दलवीर सिंह ने राजेन्द्रग्राम के समुचित विकास के साथ जोहिला नदी के जल के उपयोग के लिए दर्जनों घाट का निर्माण कर स्टॉपडैम बनाया था। लेकिन उनके द्वारा बनाए गए स्टॉप डैम पर विभाग द्वारा आजतक कोई गेट भी नहीं लगाए गए है।
बताया जाता है कि सदियो से आदिवासी समुदाय द्वारा जोहिला को अपना ईश्वर मानकर उसकी पूजा अर्चन करते हैं। लेकिन अब उन्हीं घाटों पर कचरे के ढेर ने अपना स्थान बना लिया है। राजेन्द्रग्राम मुख्यालय में एसडीएम से लेकर जलसंसाधन विभाग व जलसरंक्षण विभाग तक के अधिकारी बैठते हैं। लेकिन इनके कार्यालय से मात्र 200 मीटर की दूरी पर तथा मुख्य मार्ग के किनारे वाहनों की धुलाई का कार्य अनवरत चल रहा है। इससे जल प्रदूषण तो होता ही है,साथ ही जलीय जीवों के साथ उन जल से अपनी प्यास बुझाने लोगों व मवेशियों को भी संक्रमण हो रहा है। आदिवासी अंचल होने के कारण आज भी पुष्पराजगढ़ की आधे से अधिक आबादी नदीजल पर ही आश्रित है। वहीं पुष्पराजगढ़ विकासखंड अंतर्गत 119 ग्राम पंचायत के 269 गांव इनमें आते हैं। लेकिन इसके बाद भी ग्राम पंचायत सहित जिला प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता बरकरार है।
इनका कहना है
मामले में एसडीएम से बात कर नदी में वाहनों को उतारने से मनाही करवाता हूं। गर्मी के कारण जलस्तर कम हो गए हैं।

अजय कुमार शर्मा, कलेक्टर अनूपपुर।

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