भमाकसं केन्द्रीय महासचिव ने कहां 20 लाख लोगों को नशामुक्त से दूर रखने कही बात
अनूपपुर।'हर पिता नशे के आदी होने के बावजूद अपने बच्चों को नशा से दूर रखने का प्रयास
करता, लेकिन खुद इस नशा से अपने को मुक्त नहीं
कर पाता। क्योंकि उसमें इच्छाशक्ति की कमी है। उसमें खुद की जानकारी का अभाव तथा
जागरूकता की कमी है। यह कमी सबसे ज्यादा कम पढ़े लिखे लोगों खासकर आदिवासी
परिवारों में बनी है, जहां नशे के हालत में
ऐसे लोग सड़क हादसे का शिकार, घर में कलह का कारण
तथा सभ्य समाज में बुराईयों की पहचान बनते हैं। इसे सिर्फ और सिर्फ हृदय परिवर्तन
तथा संकल्प से ही दूर किया जा सकता है। यह बात भगवती मानव कल्याण संगठन के
केन्द्रीय महासचिव अजय अवस्थी ने शनिवार को स्थानीय प्रेसवार्ता के दौरान कही।
उन्होंने बताया जबतक मानव अपने हृदय का परिवर्तन नहीं करेगा तबतक नशामुक्त भारत का
संकल्प अधूरा रहेगा। इसके लिए ही भगवती मानव कल्याण संगठन गांव-गांव घूम लोगों के
बीच उन्हें नशा से दूर रखने जनजागरूकता पैदा करने का कार्य करती है। जिसमें
ग्रामीणों के बीच नशा से होने वाले नुकसान को बताते हुए उन्हें नशा से दूर रखने का
प्रयास किया जाता है। अभी तक संगठन द्वारा देश के 165 जिलों में यह अभियान चलाया जा रहा है। मप्र. में भी 30-32 जिलों में यह अभियान
चल रहा है। इसी क्रम में जनजागरूकता को फैलाने शहडोल सम्भाग के अनूपपुर, डिंडौरी तथा शहडोल में पांच दिवसीय जनजागरूकता परिवर्तन यात्रा का आयोजन किया
जाएगा। जिसमें 16 मई से ब्यौहारी से
यात्रा आरम्भ होकर 17 मई की शाम को अमरकंटक पहुंचेगी तथा 18 मई की शाम अनूपपुर में विश्राम करेगी। अजय अवस्थी के अनुसार इस अभियान में 20 लाख लोगों को नशा से
मुक्त कराया गया है की बात भी कही।
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