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मंगलवार, 8 मई 2018

जिले को मिलेगी जेल बिल्डिंग की सौगात, शासन ने जेल क्रियान्वयन की घोषणा

सम्भाग की सबसे बड़ी जेल,१ महिला वार्ड सहित ६ वार्ड की व्यवस्था
अनूपपुर। जेल बिल्डिंग के अभाव में पिछले १५ वर्षो से अनूपपुर जिले से शहडोल जेल परिसर का चक्कर काट रहे सैकड़ो कैदियों सहित दर्जनभर पुलिस जवानों को अब शहडोल जेल परिसर के चक्कर नहीं काटने होंगे। जिले के कैदियों को निर्धारित समय पर न्यायालय और परिजनों से मुलाकात की सुविधा के उद्देश्य से वर्ष २००७-०८ से जिला मुख्यालय के बैरीबांध गांव में निर्माणाधीन जेल बिल्डिंग आखिरकार १० वर्षो बाद कैदियों के रखने के लिए पूर्ण रूप से तैयार खड़ी हो गई है। जिसके १७ मई से विविधत शुभारम्भ होने की सम्भावना जताई जाती है। अनुमान है कि अनूपपुर जेल बिल्डिंग के आरम्भ से शासन को प्रतिमाह लगभग ३ लाख रूपए से अधिक की भी बचत होगी। जबकि ५.९९ हेक्टेयर भूमि में बना अनूपपुर जेल बिल्डिंग शहडोल सम्भाग स्तर पर सबसे बड़े विस्तारित जेल परिसरों में एक होगा, जहां २३ अधिकारी-कर्मचारी आवासीय कमरे सहित ५ पुरूष वार्ड तथा १ महिला वार्ड की व्यवस्था होगी। इसके अलावा परिसर में १ किचन वार्ड, अनाज भंडारण के लिए १ भंडार कक्ष, प्रशासनिक भवन तथा हथियार रखने का बैरक कक्ष, कैदियों से मुलाकात के लिए विशेष परिसर, जेल परिसर में ड्यूटी के दौरान सुरक्षा गार्डो के ठहरने के परिसर सहित ६ बिस्तरों वाला विशेष अस्पाल बनाया गया है। वहीं कैदियों की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर जेल परिसर के चारों ओर १४ फीट उंची कंक्रीट की दीवार खड़ी गई है। हालंाकि शासन ने २६ अप्रैल को पत्र जारी करते हुए जेलर के रूप में रविशंकर सिंह जेलर को अनूपपुर जेल लिए पदस्थ किया गया है। लेकिन विधिवत रूप में आगामी १७ मई के उपरांत यह जेल बिल्डिंग कैदियों के संरक्षण में लाया जा सकेगा।
विदित हो कि अबतक जिले के विचाराधीन कैदियों सहित सामान्य अपराधों में सजायफ्ता कैदियों को शहडोल और बुढार जेल परिसरों में रखा जाता है। जहां प्रतिदिन न्यायालीयन प्रक्रियाओं में जिला सत्र न्यायालय अनूपपुर, अपर सत्र कोतमा, तथा अपर सत्र पुष्पराजगढ़ की पेशी में कैदियों को प्रतिदिन वाहनों से शहडोल से अनूपपुर और अनूपपुर से शहडोल आवाजाही करनी पड़ती है। जबकि शहडोल जेल की क्षमता २०० कैदियों की बनाइ गई है। लेकिन अनूपपुर जिले में जेल नहीं होने के कारण वहां २०० की जगह ४०० कैदियों को रखा जा रहा था। वहीं शहडोल से अनूपपुर आने के दौरान कभी वाहनों की तकनीकी खामियों के कारण न्यायालय में कैदियों की समय पर पेशी नहीं हो पाती थी। इसके अलावा प्रतिदिन अनूपपुर के तीनों न्यायालय से शहडोल और अनूपपुर की आवाजाही लगभग १५० किलोमीटर की तय करना कैदियों सहित पुलिस जवानों के लिए परेशानी का सबब था। जिसमें कैदियों की सुरक्षा में अतिरिक्त पुलिस बलों की व्यवस्था बनाने के साथ वाहनों के परिवहन पर खर्च भी करना पड़ता था। लेकिन अब इस झंझटों से कैदियों व जवानों को मुक्ति मिल जाएगी।
 निर्माण में  लग गए १० साल
यह आश्चर्य की बात है कि जेल बिल्डिंग निर्माण में शासन को १० साल लग गए। वर्ष २००७-०८ के दौरान प्रस्तावित ४ करोड़ २० लाख की लागत से बिल्डिंग का निर्माण आरम्भ किया गया था। जिसे दो सालों में तैयार किए जाने थे। लेकिन इसी दौरान शासन से कम राशियां मिलने पर निर्माण कार्य अटक गया। वहीं बाद में दो नए टेंडर जारी करते हुए आखिरकार ६ करोड़ ५४ लाख ३० हजार में यह जेल बिल्डिंग अब पूर्ण हो सकी है।
इनका कहना है
जिले में जेल की कमी थी, जेल बिल्डिंग की उपलब्धता से कैदियों और जवानों को अब शहडोल जेल नहीं जाना होगा। कैदियों के परिवहन में शासन के उपर आने वाले अतिरिक्ति खर्च को भी कम किया जा सकेगा। इसके अलावा कैदियों को सुरक्षित न्यायालय तक पहुंचाया जा सकेगा। यही जिले के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
वैष्णव शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनूपपुर।

पत्थर व रेत का अवैध उत्खनन पर मूक दर्शक बना प्रशासन

नदियो का अस्तित्व संकट में, पहाडो को तोड किया जा रहा समतलीकरण
अनूपपुर जनपद पंचायत अनूपपुर एवं कोतमा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रो से खनिज माफियाओ द्वारा जंगल, नदी, नालो सहित शासकीय भूमि से अवैध उत्खनन कर उसका परिवहन करने में लगे हुए है। वहीं माफियाओ द्वारा किए जा रहे खनिज पदार्थो के दोहन पर जिला प्रशासन मूक दर्शक बना अपनी नाकामी या माफियाओ से मिलीभगत कर क्षेत्र में व्यवसाय कर रही है। जिसके कारण नगर सहित आसपास स्थित ग्रामीण इलाको में अवैध उत्खनन कर शासन की विभिन्न योजनाओ के माध्यम से संचालित निर्माण कार्यो में अवैध गिट्टी, बोल्डर, रेत का परिवहन कर निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। माफियाओ द्वारा नदियो एवं नालो से अवैध रेत का उत्खनन करने के साथ ही आसपास के क्षेत्रो में पत्थरो का अवैध उत्खनन करने में जुटे हुए है। इस व्यवसाय के प्रति नगर में इतनी प्रतिस्पर्धा बढी हुई है कि नगर के छोटे से लेकर बडे वाहन इस कार्यो में शामिल है।
नदियॉ व नालो हो रहा रेत का अवैध उत्खनन
जनपद कोतमा अंतर्गत केवई, कनई सहित अन्य नदियो व नालो से माफिया द्वारा रेत का अवैध उत्खनन का नदियो का स्वरूप बिगडने में लगे हुए है। एक ओर जहां अनूपपुर जिला जल अभाव ग्रस्त घोषित किया गया है। जहां पर नदियो, नालो सहित प्राकृतिक स्त्रोतो को बचाने व जल स्तर को बनाए रखने के लिए नदी नालो में कडी शटर लगाने के आदेश है। वहीं नदियो व नालो से अवैध रेत के उत्खनन पर भी जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही किए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन क्षेत्र में खनिज माफियाओ द्वारा जमकर रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
पत्थरो के उत्खनन में बारूद का हो रहा उपयोग
कोतमा जनपद अंतर्गत ग्राम पथरौडी, निगवानी, कोठी, छुल्हा, थॉनगॉव, डोगरियॉ, कपिलधारा के अर्जुन घाट, परसापानी, पडरीपानी सहित आसपास के क्षेत्रो में बारूद का उपयोग कर पत्थरों को तोडा जा रहा है। वहीं प्रतिबंध के बावजूद विस्फोटक सामग्रियो का प्रयोग किए जाने की जानकारी होने के बाद भी राजस्व, खनिज, वन, तथा पुलिस विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नही की जा रही है।
कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
लगातार शिकायत के बाद जहां खनिज विभाग द्वारा पत्थरो व रेत से लोड वाहनो पर कार्यवाही तो करता है। लेकिन बिना लीज के पत्थर के उत्खनन व रेत के उत्खनन पर विभाग लगातार अपनी उदासीनता बरत रही है। जिसके कारण खनिज माफियाओ के हौसले बुलंद है। वहीं खनिज विभाग द्वारा दिखावे की कार्यवाही में सिर्फ वाहनो को पड़कर अवैध परिवहन की कार्यवाही कर अपना कागजी कोरम पूरा करते है।
क्रेशरो में अवैध भंडारण पर कार्यवाही नही
बिजुरी क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाको सहित हाईवे मार्ग के किनारे दर्जनो क्रेशर संचालित है। जहां पर पत्थरो का अवैध उत्खनन कर उसका परिवहन करते हुए आसपास के क्रेशरो में पहुंचाया जाता है। इतना ही नहीं क्रेशर संचालक द्वारा क्रेशर में पत्थरो के अवैध भंडारण किए हुए है। वहीं खनिज विभाग द्वारा क्रेशरो की जांच न कर सड़को पर दौड रहे गिट्टी व पत्थरो से लोड वाहनो पर कार्यवाही की जाती है। जबकि इन गिट्टी व पत्थरो को किन क्रेशरो से लाना व ले जाने पर किसी तरह की कार्यवाही नही की जाती है।
इनका कहना है
जानकारी मिली है, अभियान चलाकर अवैध क्रेशर व खदान मालिको के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

राहुल शांडिल्य, खनिज निरीक्षक अनूपपुर

बिना मापदंड पूरा किए संचालित हो रहा ब्रिक्स प्लांट

प्रदूषण नियंत्रण और श्रम नियमों की उड़ा रहे धज्जियां
अनूपपुर कोतमा क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे  स्थित डिपो के पास चंद्रलोक फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट का संचालन संचालक द्वारा बिना मापदंडो को पूरा किए संचालित किया जा रहा है। जिसमें प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अवहेलना, बिना अनुमति खनिज का भंडारण, मजदूरो की सुरक्षा, बिना वन विभाग के एनओसी तथा श्रम विभाग और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के नियमो को दर किनार करते हुए रिहायशी क्षेत्र में उद्योग का संचालन किया जा रहा है, जिसके कारण स्थानीय लोगों को प्रदूषण से परेशान होना पड़ रहा है।
पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन
नियमों के अनुसार फ्लाई ऐश ब्रिक्स के संचालन के लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वायु अधिनियम का पालन करना अनिवार्य है। लेकिन चंद्रलोक फ्लाई ऐश ब्रिक्स के संचालक द्वारा बिना प्रदूषण नियंत्रण के नियमो का पालन किए बिना ही उद्योग का संचालन किया जा रहा है। जिससे आसपास के क्षेत्रो में पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है लेकिन उद्योग संचालक द्वारा इस ओर किसी तरह का ध्यान नही दिया जा रहा।
मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
फ्लाई ऐश ब्रिक्स के संचालक द्वारा श्रम विभाग के नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए यहां काम करने वाले मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। जहां कार्य करने वाले मजदूरों को कार्य का निर्धारित भुगतान नही दिए जाने तथा कार्य के दौरान मजदूरों की सुरक्षा व अन्य उपकरणों के बगैर ही उनसे कार्य करवाया जा रहा है। वहीं प्लांट में कार्य करने वाले मजदूर धूल एवं डस्ट के के बीच कार्य कर संक्रमण से ग्रसित हो रहे है।
नहीं है वन विभाग की एनओसी
जानकारी के अनुसार चंद्रलोक फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट के संचालन द्वारा प्लांट संचालन के लिए वन विभाग से एनओसी तक नहीं ली है, जबकि उक्त प्लांट में ट्रैक्टर के माध्यम से रेत भंडारण के साथ बड़ी-बड़ी मशीनो का संचालन किया जा रहा है। इतना ही नही फ्लाई ऐश ब्रिक्स के निर्माण के लिए संचालक द्वारा खनिज विभाग से बिना अनुमति के ही रेत एवं अन्य खनिजों पदार्थो का का अवैध तरीके से भंडारण किए हुए है।
इनका कहना है
नियम के विपरीत चंद्रलोक फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट का संचालन किया जा रहा है, जिसमें संचालक द्वारा वन विभाग से एनओसी नहीं ली है।
आर, एस. त्रिपाठी, रेंजर वन विभाग कोतमा



इनका कहना है
अगर ब्रिक्स प्लांट में प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो जांच कर कार्यवाही की जाएगी।

डी.एन. पटेल, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी शहडोल

15 लाख की पीसीसी रोड चढी भ्रष्टाचार की भेंट

अनूपपुर जनपद पंचायत कोतमा अंर्तगत ग्राम पंंचायत पैरीचुआ में वर्ष 2017-18 में स्वीकृत पीसीसी रोड आंतरिक मार्ग निर्माण क्रेशर से डोंगरी तक का कार्य पंचायत द्वारा जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि मद से 14.99 लाख की लागत से 6 माह पूर्व में निर्माण करवाया गया था, जहां निर्माण एजेंसी द्वारा गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य किया गया, इसके साथ ही इस मार्ग में दिन रात पत्थर व बोल्डरो से ओव्हर लोड भारी वाहनो के संचालन के कारण सडक पूरी तरह से उखड गई है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा सडक निर्माण का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया गया, जहां ठेकेदार द्वारा निर्धारित मापदंडो के अनुसार निर्माण सामग्री का उपयोग किए बिना ही गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य कर राशि की बंदरबांट की गई है।
व्यक्तिगत हित के लिए सडक निर्माण
ग्रामीणो ने बताया कि उक्त पीसीसी सडक निर्माण में ग्रामीणो को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, जिस जगह पर सड़क निर्माण कार्य करवाया गया है वहां दो से चार घर ही है। जहां ग्रामीणो का आनाजाना ना के बराबर है। ग्रामीणो ने बताया कि यह सडक निर्माण क्रेशर तक किया गया है, जिसका लाभ क्रेशर संचालक को दिया गया है। जिससे उनके वाहनो का आवागमन में आसानी बनी रहे।
सडक निर्माण में निजी भूमि का हुआ उपयोग

ग्राम वासियों का कहना है कि किसानो की निजी भूमि का उपयोग कर पंचायत द्वारा सडक बनाई गई, जिससे पुस्तैनी भू-स्वामी परेशान है। वहीं इनकी भूमि पर बनाए गए सड़क पर इन्हे कोई मुआवजा दिया गया। ग्राम पैरीचूआ के ग्रामीणो ने कलेक्टर से मांग की हैं कि डोगरी से क्रेशर तक बनाई गई सडक की जांच कराई जाने की मांग की है। 

भाकपा ने बीटगार्ड के खिलाफ किया वनमंडलाधिकारी कार्यालय का घेराव

वन पट्टा के नाम पर अवैध वसूली की हुई शिकायत

अनूपपुर वनपरिक्षेत्र अनूपपुर के ग्राम बेला में वनाधिकार के तहत पुस्तैनी रूप से काबिज कास्तकारों को पट्टा दिलाए जाने के झंासे में बीटगार्ड बीट राजबली साकेत द्वारा कास्तकारों से दो-दो हजार रूपए के अवैध वसूली करने तथा इसकी शिकायत करने वाले सूचनकर्ता के खिलाफ ही अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के फर्जी वन अपराध व मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी माक्र्सवादी जिला समिति अनूपपुर के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने मंगलवार 8 मई को वनमंडलाधिकारी अनूपपुर कार्यालय का घेराव किया। जहां बीटगार्ड के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई करने तथा शिकायतकर्ता तथा भाकपा जिला समिति के सचिव रजन कुमार राठौर के खिलाफ बनाने के फर्जी प्रकरण को निरस्त करने की मांग की। साथ ही मामले को वनविभाग द्वारा जांच कराने की भी अपील की। वहीं बिना अनुमति वनमंडलाधिकारी कार्यालय के कम्युनिष्टों के घेराव से पूरा वनविभाग सकते में आ गया। आनन फानन में वन विभाग एसडीओ ने घटना की सूचना अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित कोतवाली थाना को दी। मौके पर पहुंचे एसडीओपी अनूपपुर उमेश गर्ग, तहसीलदार ईश्वर प्रधान सहित थाना प्रभारी वीबी टांडिया ने वनविभाग एसडीओके साथ घेराव कर रहे कुछ लोगों के साथ कार्यालय में चर्चा की। लगभग 15-20 मिनट की चर्चा के उपरांत वनविभाग एसडीओ के आश्वासन पर प्रदर्शनकारियों ने सहमति जताते हुए घेराव से वापसी की। हालांकि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई नहीं होने पर आगामी 23 मई को भोपाल कूच करते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत करने की चेतावनी भी दी है। बताया जाता है कि इससे पूर्व 17 अप्रैल को भाकपा सदस्यों ने मामले में वनमंडलाधिकारी अनूपपुर से शिकायत करते हुए 8 मई  दिनों धरना प्रदर्शन व घेराव किए जाने की चेतावनी दी थी। जहां ज्ञापन में सम्बंधित प्रकरण का हवाला देते हुए कार्रवाई करने तथा फर्जी प्रकरण के निरस्त करने की अपील की थी। 

जन सुनवाई में जिले भर से आए आवेदकों की सुनी गई समस्याएं

अनूपपुर। संयुक्त कलेक्ट्रेट सभागार में ८ मई को जनसुनवाई कार्यक्रम में जिले भर से आए आवेदको की अपर कलेक्टर डॉ.आर.पी.तिवारी ने समस्याएं सुनी गई। इस मौके पर विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। जनसुनवाई में वेंकटनगर निवासी नसीम खान ने पिता के मृृत्यु उपरांत राशि नहीं मिलने, शौचालय की राशि प्राप्त नहीं होने, आवास निर्माण नहीं होने के संबंध में आवेदन दिया, ग्राम पंचायत बैहाटोला अंतर्गत ग्राम बाबाटोला वार्ड क्रमांक ६ में हैंडपंप खनन करवाने के संबंध में, बिजुरी निवासी सरिता सेन पति चित्र सेन द्वारा जिला अस्पताल बोर्ड द्वारा नि:शक्तता प्रमाण पत्र दिलाए जाने, जैतहरी जनपद पंचायत के ग्राम सुलकारी निवासी फूलबाई पति छोटेलाल राठौर ने प्रधानमंत्री आवास योजना दिलाए जाने के संबंध में आवेदन, जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के ग्राम शीतलपानी निवासी समस्त जनता ने सुदूर पहुंचमार्ग एवं पेयजल के संबंध में आवेदन, ग्राम रक्शा निवासी लाल सिंह ने जमीन का सीमांकन कराने के संबंध में आवेदन एवं अनूपपुर वार्ड नंबर ११ में वार्ड के वासियों ने पेयजल समस्या के निदान हेतु हैण्डपंप लगवाए जाने के संबंध में आवेदन दिया। 

इंगांराजवि लालपुर में जैविक खाद् के माध्यम से फलों की खेती का अभिनव प्रयोग



अनूपपुर ग्रामीणों को जैविक खाद् के माध्यम से खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकटंक के पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से एक पहल की गई है। इसके अंतर्गत विभाग के शिक्षक और छात्र ग्रामीणों को घर से निकलने वाले जैविक पदार्थों को एकत्रित कर उसे खाद् में बदलने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस खाद् को बाद में फलों की खेती में प्रयोग किया जा सकेगा। देश में कार्बनिक खाद् से पैदा होने वाले उत्पादों के ब$ढते बाजार को देखते हुए यह पहल की गई है। कुलपति प्रो.टी.वी.कटटीमनी के निर्देशन में पर्यावरण विभागाध्यक्ष डॉ.तरूण कुमार ठाकुर, डॉ. संदीप कौशिक और डॉ.पल्लवी दास ने 'रिचिंग द अनरिच्डÓ कार्यक्रम शुरू किया है। इसके अंतर्गत लालपुर के कई भागों में गड्ढे बनाकर उसमें घर से निकलने वाले खाद्य पदार्थों,छिलकों, खराब फलों इत्यादि को डाल दिया जाता है। यह गड्ढे छात्रों द्वारा वैज्ञानिक विधि से तैयार किए गए हैं जिनमें एकत्रित पदार्थों को कार्बनिक खाद् बनाया जा रहा है। प्रो.ठाकुर ने बताया कि ग्राम पंचायत के सहयोग से बनाए गए इन गड्ढों में भरी कार्बनिक खाद् का निरंतर साप्ताहिक परीक्षण किया जाता है। दूसरे चरण में ग्रामीणों को अमरूद, अनार और आम के उन्नत पौधों को इन गड्ढों में बोने के लिए दिया जाएगा। जिससे आने वाले समय में खेती के साथ फलदार वृक्षों से भी ग्रामीणों और किसानों की आमदनी बढ सके।
विभाग ने 'स्वच्छ भारत समर इंटर्नफिप प्रोग्राम शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अंतर्गत दो क्रेडिट के प्रोग्राम में छात्रों को स्वच्छ भारत अभियान की विभिन्न योजनाओं पर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करना होगा। सामुदायिक सेवा के इस कार्यक्रम की अवधि 100 घंटे की होगी जिसके अंत में छात्रों को सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। इसमें प्रमुख रूप से छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बढाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विभाग इस प्रकार की सामुदायिक सेवाओं में पहले से ही कार्यरत है। अब प्रयास किया जा रहा है कि इसे शैक्षणिक पाठ्यक्रम का अभिन्न भाग बना लिया जाए।

सोमवार, 7 मई 2018

पीसीसी सड़क निर्माण पर स्वीकृत राशि के अतिरिक्त डेढ़ लाख से अधिक का भुगतान

मामला जनपद पुष्पराजगढ़ के ३६ ग्राम पंचायतो का
अनूपपुर जिले की सबसे बडी जनपद पुष्पराजगढ़ में शासकीय राशि के दुरूपयोग, गबन, बिना कार्य के राशि आहरण जैसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें अब पुष्पराजगढ़ के लगभग 36 ग्राम पंचायतो में स्वीकृत हुए 47 स्थानो पर पीसीसी सड़क निर्माण के नाम पर सरपंच-सचिव द्वारा इन पीसीसी सड़क निर्माण कार्य मे स्वीकृत राशि 1 करोड 93 लाख 12 हजार 931 रूपए की जगह 2 करोड 99 लाख 6 हजार 473 रूपए का भुगतान किए जाने की शिकायत के बाद भी अब तक किसी तरह की जांच नही हुई है। वहीं इस पूरे मामले में जिला प्रशासन पर भी कई प्रश्र चिन्ह खड़े हो रहे है।
जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के 36 ग्राम पंचायतो में पंच परमेश्वर मद से किए गए 42 पीसीसी सड़क निर्माण पर तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति राशि से दोगुनी राशि का आहरण करते हुए सरपंच एवं सचिव द्वारा जमकर भ्रष्टाचार कर शासकीय राशि की बंदरबांट की गई है। जिसकी शिकायत जिला पंचायत सदस्य माया चौधरी द्वारा 1 फरवरी 2018 को जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ केव्हीएस चौधरी से की गई थी, जिस पर जिला पंचायत सीईओ ने पूरे मामले में पुष्पराजगढ़ सीईओ राजेन्द्र त्रिपाठी को संबंधित सरपंच व सचिवो द्वारा बिना कार्य करवाएं अधिक राशि भुगतान पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जनपद सीईओ की मनमानी के कारण अब तक इन सरपंच सचिवो के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नही की जा सकी है।
इन पंचायतो में हुआ अतिरिक्त राशि का भुगतान
जनपद पुष्पराजगढ़ के विभिन्न पंचायतों में हुए 47 पीसीसी सड़क निर्माण कार्या में अतिरिक्त राशि का भुगतान जिसमें ग्राम पंचायत अलवार में 8 लाख, अचलपुर में 26372, अमदारी में 281365अमगवां में 33161, बम्हनी में 185553, बेंदी में 300935, श्मरहा में 135360, बीजापुरी नं. 1 में 583860, बिजौरा में 110000, चंदनिया में 103480, देवरा में 41475, धरमदास 26 हजार, दोनिया 764460, गेडीआमा में 367314, घुईदादर में 314238, हर्राटोला में 363257, जरहा में 349840, जरही में 85375, जीलंग में 404000, जुहिली में 47691, कछराटोला में 317323, करनपठार में 325326, करौंदी में 122396, करपा में 60165, केकरिया में 78827, खांटी में 89400, किरगी में 508537, कोईलारी में 144949, लखैरा में 197080, लपटी में 139770, मझगवां में 86005, मौहारी में 257920, नगुला में 599000, नेगवां में 179500, पडरी में 162889, परसवार में 119922, परसेलकला में 169375, पिपरहा में 274955, पिपरहुटा में 236475, सालरगोंदी में 355400, सल्हारो में 65600, सरई में 213700, ताली में 159273, तुलरा में 204002 एवं उफरीकला में 242000 रूपए का अतिरिक्त राशि आहरित की गई है।
करोड़ो के अतिरिक्त भुगतान पर प्रशासन मौन
पीसीसी सड़क निर्माण कार्य में 2 करोड़ 11 लाख 80 हजार 675 रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति मांगी गई थी जिसमें इन कार्यो के लिए 1 करोड़ 93 लाख 12 हजार 931 की तकनीकी स्वीकृति दी गई थी। जिसके बावजूद सरपंच सचिव द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति के आधार पर ही कार्य कर 1 करोड़ से अधिक राशि का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। जिला पंचायत सदस्य की शिकायत के बाद 3 फरवरी को तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ ने मामले में जनपद सीईओ को पूरे मामले में बैंकों स्टेटमेंट मंगाकर संबंधित पंचायतों के खिलाफ 7 दिनो के अंदर कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। लेकिन 3 माह बीत जाने के बाद भी अब तक सरपंच सचिव के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नही की जा सकी है। जिसके कारण अब जिला प्रशासन पर सवाड़ खड़े होते हुए प्रश्र चिन्ह खडे हो रहे है।
इनका कहना है
पूरे मामले में सत्यापन का कार्य सहायक उपयंत्री डीएस भदौरिया से कराया जा रहा है। प्रत्येक खाते की जांच भी कराई जा रही है।

राजेन्द्र त्रिपाठी, जनपद सीईओ पुष्पराजगढ़

फिल्टर प्लांट पर अबतक 4 करोड़ खर्च, पेयजल को परेशान वार्डवासी

जिला मुख्यालय की प्यास बुझाने में नाकाम नपा
अनूपपुर नगर पालिका अनूपपुर के 15 वार्डो में पेयजल की उपलब्धता के लिए वर्ष २०१४ में तिपान नदी में फिल्टर प्लांट का निर्माण 14 करोड 70 लाख रूपए स्वीकृत हुआ था। जिसमें नगर के समस्त वार्डो में 4 ओव्हर हैड टैंक के साथ 6 किमी लंबी मुख्य पाईप लाईन के साथ 60 किमी ब्रांच लाईन की पाईप बिछाने का कार्य किया जा रहा है। जहां नपा द्वारा हर्री बर्री मार्ग स्थित तिपाननदी के किनारे 50 डिसमिल जमीन आवंटित कराकर फिल्टर प्लांट स्थापित कर कार्य प्रारंभ कराया। लेकिन तिपान नदी की टूटती जल धारा के कारण यह परियोजना फेल होती नजर आ रही है।
सोन, तिपान एवं चंदास नदी की टूटी जलधारा
जिला जला अभाव ग्रस्त घोषित होने के कारण जहां कलेक्टर के निर्देशानुसार नदी, नालो में कडी शटर लगाने के निर्देश दिए गए थे, जिससे जल को रोक जिले का जला स्तर बनाया रखा जाए। लेकिन वर्तमान में जिला मुख्यालय से निकलने वाली सोन, तिपान, चंदास एवं बकान नदी की जलधारा पूरी तरह टूट गई। जिसके कारण जिला मुख्यालय का जल स्तर नीचे चला गया है।
सूखी पड़ी चंदास नदी
नपा द्वार तिपान नदी में किए जा रहे फिल्टर प्लांट निर्माण  स्थल के पास जहां नदी पूरी तरह से सूखी पड़ी हुई है। जहां सिर्फ बारिश के समय ही पानी का बहाव दिखता है।  वहीं
वहीं तिपान नदी में जगह-जगह कडी शटर लगा दिए जाने के कारण पानी का बहाव पूरी तरह से बंद पड़ा है और नदी पूरी तरह से सूख चुकी है। जानकारी के अनुसार इससे पूर्व भी अनूपपुर रेलवे द्वारा तिपाननदी के किनारे करोड़ों की लागत से रेलवे कॉलोनी और स्टेशन परिसर के लिए जलापूर्ति का प्रयास किया था। जहां पानी के अभाव के कारण पूरी योजना फेल हो गई और आज रेलवे कॉलोनी जल समस्या से जूझ रहा है।
बारिश में ही बुझ सकेगी नगरवासियों की प्यास
तिपान नदी में फिल्टर प्लांट निर्माण के साथ पानी रोकने डैम का निर्माण किया जा रहा है, जहां बारिश के दौरान पानी को रोक एकत्रित किया जाएगा। लेकिन वर्तमान में तिपान नदी की हालात बद से बदत्तर हो चली है। जहां इस भीषण गर्मी में नदी की टूटी जलधारा नदी के अस्तित्व पर ही खतरा बन गई है और करोडो की लागत से बनाया गया फिल्टर प्लांट नगर वासियो की प्यास बुझाने में असफल साबित होगा।
इनका कहना है
फिल्टर प्लांट के प्रारंभ होने तथा पानी के स्टोरेज के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

अशीष शर्मा, सीएमओ अनूपपुर

हरिजन मोहल्ले में गहराया जल संकट

कोतमा। नगर पालिका कोतमा क्षेत्र अंर्तगत वार्ड क्रमांक 7 एलआईसी के पीछे हरिजन मोहल्ला में पेयजल की समस्या से वार्डवासी जूझ रहे है। वार्ड वासियों ने बताया कि पूर्व में नपा द्वारा नए हैंडपंप लगवाए गए थे, जो वर्तमान में बंद पड़ा है। जिस कारण वार्डवासी पेयजल के लिए भटकने को मजबूर है। जहां उन्हे १ किमी दूर जाकर दूसरे हैण्डपंप से पानी लाना पड़ता है। वार्ड वासियों ने नपा प्रशासन से पानी के संकट से निजात दिलाने की मांग की है। वहीं जब इस संबंध में सीएमओ कोतमा श्रीनिवास शर्मा से जानकारी चाही गई तो उन्होने बताया कि कर्मचारियो को भेजकर तत्काल हैण्डपंप सुधारवाया जाएगा। जब तक के लिए टैंकर भेज पानी का वितरण किया जाएगा। 

भीषण गर्मी: प्राइमरी कक्षा तक की छुट्टी, 6वीं से 12वीं तक की कक्षाएं यथावत

अनूपपु्र। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले मे गर्मी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। वही इस भीषण गर्मी से विद्यालय के ...