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सोमवार, 7 मई 2018

गैस उपभोक्ताओ से परिवहन के नाम पर हो रही वसूली

कोतमा संभागायुक्त द्वारा गैस उपभोक्ताओ से हो रही अवैध वसूली की लगातार शिकायतो के बाद घर पहुंच सेवा के नाम पर हो रही लूट पर सख्ती से रोक लगाने निर्देश जारी किया गया था, जिस पालन क्षेत्र के गैस एजेंसी संचालको द्वारा नही किया जा रहा है। वहीं गैस एजेंसी संचालक द्वारा गैस रिफलिंग के नाम पर निर्धारित कीमत मई माह मे घर पहुंच सेवा 674.५० रूपए तय होने के बावजूद उपभोक्ताओ से घर पहुंच सेवा के नाम पर 690 रूपए वसूल किया जा रहा है। इतना ही नही खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण भोपाल द्वारा उज्जवला गैस रिफलिंग हेतु संचालको को हाट बाजार जाकर गैस रिफलिंग देने के निर्देश के बाद भी गैस वाहन हाट बाजार नही पहुंच रहे है।
चूल्हे मे बन रहा भोजन
शासन द्वारा धुएं की समस्या से निजात दिलाने के लिए उज्जवला योजना के तहत गैस तो प्रदान कर दी गई। लेकिन हितग्राहियो के रिफलिंग नियमो के अनभिज्ञता के कारण गैस समाप्त हो जाने के बाद पुन: उन्हे सिलेण्डर के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिससे वे चूल्हे मे खाना बनाने विवश है।
कम गैस की शिकायत
क्षेत्र मे उपभोक्ताओ को गैस डिलेवरी देते समय कर्मचारियो द्वारा वजन करके नही दिया जाता, जिससे कई बार कम गैस की भी शिकायत सामने आई है, पहले से ही महंगाई से परेशान उपभोक्ताओ को 274 की जगह 290 रूपए वसूले जाने एवं गैस कम मिलने से अर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। उपभोक्ताओ ने कलेक्टर से क्षेत्र मे मची अनियमितता पर रोक लगाए जाने की मांग की गई है।
इनका कहना है
मई माह मे 674. 50 रूपए की कीमत घर पहुंच तय है कोई भी उपभोक्ता इससे अधिक का भुगतान ना करे। संचालको के द्वारा ज्यादा रूपए मांगे जाने पर शिकायत करे तत्काल कार्यवाही होगी।

प्रदीप द्विवेदी, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी कोतमा

पेयजल समस्या निदान के लिए अधिकारी त्वरित करे कार्यवाही - कलेक्टर

अनूपपुर। समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर अजय कुमार शर्मा ने ग्रीष्म ऋतु में जनमानस के पेयजल का संकट न हो इस बात को दृष्टिगत रख अधिकारी त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर डॉ. आर.पी. तिवारी, एसडीएम तथा विभिन्न विभागों के जिला प्रमुख उपस्थित रहे। बैठक में भवन संनिर्माण कर्मकार के अंतर्गत असंगठित श्रमिकों के पंजीयन का समीक्षा करते हुए जिले चारों विकासखंडो की जानकारी प्राप्त कर आगामी समय में सामूहिक विवाह के तैयारी के निर्देश दिए। सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए विकासखंडवार पंजीयन सुनिश्चित करने, लक्ष्य के विरूद्ध अधिक से अधिक पंजीयन कराने को कहा। बैठक में कलेक्टर ने आवासीय पट्टों के वितरण, वनाधिकार प्रमाण पत्रों की समीक्षा की। सहायक ग्रेड तीन के रिक्त पदों की भर्ती, उज्जवला योजना, लाडली लक्ष्मी योजना, प्रधान मंत्री आवास योजना तथा ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं के स्वीकृति आदेश पत्रक का वितरण बैगा विशेष जनजाति के लोगों को शासन द्वारा निर्धारित राशि का वितरण, दैनिक भोगियो की वेतन देने साथ ही कृषक उद्यमी योजना, उजाला योजना, तालाब गहरीकरण के कार्यो, पेयजल परिवहन आदि की समीक्षा कर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। 


शिमला में आयोजित योग प्रतियोगिता में इंगांराजवि की टीम को तीन पुरस्कार



अनूपपुर हिमाचल प्रदेश के शिमला में आयोजित ओपन वल्र्ड योग प्रतियोगिता में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकटंक के योग विभाग के तीन छात्रों ने उत्कृष्ठ प्रदर्शन करते हुए दो द्वितीय और एक तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। प्रतियोगिता में दस राज्यों की टीमों के योग छात्रों को पछाड़ते हुए इंगांराजवि के छात्रों ने यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
यूथ स्पोर्ट्स सोशल एंड कल्चरल सोसाइटी, नई दिल्ली और योग स्पोर्ट्स फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस योग प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय की आठ सदस्यीय टीम ने योग प्रशिक्षक डॉ.श्याम सुंदर पाल के निर्देशन में भाग लिया। इनमें से उत्तम गुप्ता को २५-३०वर्ष के आयुवर्ग में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। रितु केवट ने छात्राओं के २५-३० वर्ष के आयुवर्ग में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं उर्मिला ने २०-२५ वर्ष के आयुवर्ग में तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह सभी विश्वविद्यालय के योग विभाग में बी.एससी. योग के छात्र-छात्राएं हैं।
प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, केरल, कर्नाटक सहित दस राज्यों की योग टीमों ने भाग लिया। इंगांराजवि की टीम को ये पुरस्कार विभिन्न प्रकार के आसनों का सर्वोत्तम प्रदर्शन करने पर दिए गए। विजेताओं को हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ने पुरस्कृत किया।
कुलपति प्रो.टी.वी. कटटीमनी ने योग विभाग की स्थापना के बाद अल्प समय में ही निरंतर राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने पर विभाग के डीन प्रो.एन.एस.हरि नारायणमूर्ति और विभागाध्यक्ष डॉ.मोहन लाल चढ़ार सहित अन्य शिक्षकों और छात्रों को बधाई दी है।
  

जोहिला नदी के बीच धुल रहे सैकड़ो वाहन, बारहमासी जोहिला अब सूखने के कगार पर

अनूपपुर राजेन्द्रग्राम सहित आसपास के सैकड़ों गांवों की जीवनदायिनी मानी जाने वाली एकमात्र जोहिला नदी अब अपने अस्तित्व बनाये रखने की लड़ाई लड़ रही है। बारह मास लोगों के दैनिक जीवन में मिठास घोलने के साथ किसानों के लिए वरदान बनी जोहिला का जल प्रशासनिक लापरवाही में अब विरल हो चली है। जलसंकट की समस्या तथा नदियों को सहेजने के आदेश के बाद भी प्रशासन के नाकों तले स्थानीय वाहन मालिकों ने जोहिला नदी को अपनी वाहनों धुलाई का सबसे सस्ता वाशिंग पिट बना दिया है, जहां दिनभर सैकड़ो की तादाद में भारी वाहनों के साथ साथ छोटे वाहन जोहिला के सीने पर उतर अपने कचरा, मलवा और ग्रीस ऑयल जैसे प्रदूषित रसायन छोड़े जा रहे है। जिसके कारण अमरकंटक से निकलकर उमरिया और बाद में सोननदी में समाहित होने वाली इस नदी की जलधारा अब सफेद की जगह काली दिखने लगी है। वहीं कचरे के पटाव के कारण नदी घाटों से दूर होती जा रही है। जबकि अमरकंटक से नीचे उतरती जोहिला में जगह जगह किसानों ने अपनी सुविधा के अनुसार बोरीबंधान कर इसके धार के अस्तिव को ही समाप्त कर दिया है। जहां सालों भर कल-कल रूप में बहती बारहमासी जोहिला अब गर्मी के दिनों में सामान्य नदियों की भांति सूख रही है। बावजूद प्रशासन की उदासीनता बरकार बनी हुई है। आश्चर्य की बात है कि राजेन्द्रग्राम मुख्यालय से चंद मीटर की दूरी पर बहती जाहिला की मझधार में सैकड़ो भारी वाहन दिन के उजाले में उतार उनकी धुलाई की जा रही है और ये सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है। लेकिन जोहिला बचाने न तो प्रदूषण विभाग और ना ही जिला प्रशाासन के अधिकारियों द्वारा कोई पहल की जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर जोहिला की धार सूखी तो इससे राजेन्द्रग्राम सहित आसपास के सैकड़ों गांवों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी। उनके अनुसार एक समय जोहिला के पानी को पीकर राजेन्द्रग्राम वासी अपना जीवन यापन कर रहे थे। वहीं किसानों के खेती सिचाई के लिए यही एक मात्र नदी साधन के रूप में उपलब्ध थी। इसे देखते हुए पूर्वमंत्री रहे स्व. दलवीर सिंह ने राजेन्द्रग्राम के समुचित विकास के साथ जोहिला नदी के जल के उपयोग के लिए दर्जनों घाट का निर्माण कर स्टॉपडैम बनाया था। लेकिन उनके द्वारा बनाए गए स्टॉप डैम पर विभाग द्वारा आजतक कोई गेट भी नहीं लगाए गए है।
बताया जाता है कि सदियो से आदिवासी समुदाय द्वारा जोहिला को अपना ईश्वर मानकर उसकी पूजा अर्चन करते हैं। लेकिन अब उन्हीं घाटों पर कचरे के ढेर ने अपना स्थान बना लिया है। राजेन्द्रग्राम मुख्यालय में एसडीएम से लेकर जलसंसाधन विभाग व जलसरंक्षण विभाग तक के अधिकारी बैठते हैं। लेकिन इनके कार्यालय से मात्र 200 मीटर की दूरी पर तथा मुख्य मार्ग के किनारे वाहनों की धुलाई का कार्य अनवरत चल रहा है। इससे जल प्रदूषण तो होता ही है,साथ ही जलीय जीवों के साथ उन जल से अपनी प्यास बुझाने लोगों व मवेशियों को भी संक्रमण हो रहा है। आदिवासी अंचल होने के कारण आज भी पुष्पराजगढ़ की आधे से अधिक आबादी नदीजल पर ही आश्रित है। वहीं पुष्पराजगढ़ विकासखंड अंतर्गत 119 ग्राम पंचायत के 269 गांव इनमें आते हैं। लेकिन इसके बाद भी ग्राम पंचायत सहित जिला प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता बरकरार है।
इनका कहना है
मामले में एसडीएम से बात कर नदी में वाहनों को उतारने से मनाही करवाता हूं। गर्मी के कारण जलस्तर कम हो गए हैं।

अजय कुमार शर्मा, कलेक्टर अनूपपुर।

तेंदूपत्ता पर मौसम के ग्रहण की पड़ी काली छाया

गर्मी न पडऩे से विभाग के मांथे पर पड़ बल
 अनूपपुर तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए फड़ों में काम शुरू हो गया है। पत्तों की कोपलें तैयार होने लगी है। चुनावी वर्ष होने के कारण तेंदूपत्ता खरीदी के लिए प्रति मानक बोरा दर 750 रुपए बढ़ाया गया है और संग्राहकों को इस वर्ष बोनस के साथ ही चप्पल,जूता, साड़ी तथा पानी की बॉटल दिए जाएंगे। पिछले वर्ष लक्ष्य से अधिक संग्रहण हो गया था किंतु इस वर्ष मौसम पत्तों पर विपरीत असर छोड़ रहा है। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए गरीबो का हरा सोना कहे जाने वाले तेंदूपत्ता पर मौसम के ग्रहण की काली छाया पढऩे के आसार हो रहे हैं। पर्याप्त गर्मी न पडऩे से बन रही ऐसी स्थिति को लेकर विभाग के भी मांथो पर बल पड़ रहे हैं। जिससे संग्रहण लक्ष्य पूरा होने को लेकर विभाग और ठेकेदार सहित वनवासी सभी परेशान हैं। अनूपपुर वनमण्डल को 22 हजार 200 मानक बोरे संग्रहण का लक्ष्य दिया गया है।
जिले में आठ वन समितियां
जिले में तेंदूपत्ता तुड़ाई का समय अब शुरू हो गया है। मई माह में पत्तों की तुड़ाई कार्य किया जाता है। इस एक माह में बीड़ी बनाने योग्य पत्ता प्राप्त किया जाता है। वन्य क्षेत्रों में तेंदू के पेड़ मुख्य रूप से होते हैं। जिनकी तुड़ाई आसपास के ग्रामीणजन द्वारा की जाती है। जिले में 8 वन समितियां हैं जहां तेंदू के पत्तों की तुड़ाई जंगल में जाकर की जाती है। वन विभाग द्वारा इस कार्य के लिए 185 फड़ मुंशी तैनात कर दिए हैं जहां ग्रामीण तोड़कर लाए तेंदू के पत्तों की गड्डी जमा करेंगे। इन फडों में विभाग के मुंशी के साथ-साथ क्रेता द्वारा भी अपना एक व्यक्ति रखा गया है। इस वर्ष पांच ठेकेदारों ने आनलाइन द्वारा तेंदूपत्ता खरीदी का कार्य लिया है।
भटकना नहीं पड़ेगा
संग्रहकों को तेंदूपत्ते की उपज का पूरा दाम मिल सके और उसे भटकना न पड़े इसके लिए पिछले वर्ष की तरह प्रत्येक संग्राहक का बैंक में खाता खुलवाकर खाता नंबर विभाग ने ले लिया है। इस वर्ष करीब 60 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों का पंजीयन किया गया है। प्रत्येक घर से महिला अथवा पुरूष में से किसी एक मुखिया के नाम से कार्ड बनाया गया है। संग्राहकों को पत्तों की तुड़ाई के दौरान जंगल में या आने-जाने के दौरान यदि किसी वजह से घायल होना प?ा या फिर मौत हुई तो शासन द्वारा उन्हे घायल होने पर10 हजार से लेकर 50 हजार एवं मृत्यु की दशाओं पर 2 लाख रुपए देने का प्रावधान सुनिश्चित किया हुआ हैं। इस वर्ष शासन ने चुनाव के इस वर्ष संग्राहकों के लिए और नई सुविधाएं देने का फैसला लिया है। वन विभाग से प्राप्त् जानकारी अनुसार महिला संग्राहकों को सूरत की सा?ी और हरियाणा के लिबर्टी कंपनी का चप्पल दी जाएगी। वहीं पुरूषों को जूता दिया जाएगा। प्रत्येक को 1. 5 लीटर का सैलो कंपनी का पानी बॉटल मिलेगा। 13 हजार 592 ऐसे संग्राहकों का चयन इन तीनो सुविधाएं देने के लिए किया गया है।
मौसम में हो रहे उलटफेर से लक्ष्य पर संशय
इस वर्ष मौसम में हो रहे उलटफेर के कारण तेंदूपत्ते की उपज बीते वर्ष से कम ही नजर आ रही है। जिससे आदिवासियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की संभावना जानकार बता रहे हैं। अभी महुआ की फसल मौसम की भेंट चढ़ गई। अब तेंदूपत्ता पर संकट मंडरा रहा है। बताया गया 15 से 20 मार्च के मध्य शाखकर्तन का कार्य कर लिया गया था ताकि बीड़ी के लिए तेंदू में अच्छे कोपले आएं। वर्तमान समय में कोपले पेड़ो पर आ गए हैं। पत्तों की क्वालिटी बहुत महत्वपूर्ण रखती है। जितनी अच्छी गर्मी रहेगी पत्ते भी बेहतर आएंगे और पत्तों के आधार पर यह पूरा कार्य निर्भर है।
बारिश होने पर पत्तों पर लगेगा माता रोग
बताया गया यदि पानी गिरा तो पत्तों में माता रोग लग जाता है। जिस तरह बादल छा रहे हैं। बारिश हुई तो तेंदू के पत्ते खराब हो जाएंगे और इसका असर सबसे अधिक ग्रामीणों तथा वनवासियों को होगा। क्योंकि पत्ता तुड़ाई और पत्तों की गड्डी बनाकर फड तक पहुंचाने में पूरा परिवार मिलकर काम करता है। महिलाएं जंगल जाकर जोखिम उठाकर पत्ता लाती हैं फिर घर पर सभी सदस्य मिलकर गड्डी तैयार करते हैं और पुरूष फड में जाकर एकत्रित पत्तों को जमा करता है। इस एक माह में इन परिवारो को खासी आमदनी हो जाती है। मौसम के प्रतिकूल प्रभाव का असर पत्तों के साथ ही इन परिवारों पर भी पडेगा। उन्हे आमदनी कम होगी और बोनस से भी वंचित होना पड जाएगा।
22 हजार 200 मानक बोरा का लक्ष्य
वन मण्डल अनूपपुर में पिछले वर्ष 22 हजार 400 मानक बोरा का लक्ष्य रखा था। इस वर्ष 22 हजार 200 का लक्ष्य बनाया हुआ है। 8 समिति बनाई गई है।जिला वनोपज सहकारी संघ मर्यादित अनूपपुर के देखरेख में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य 30 मई तक चलेगा। हालंकि 10 मई से फड़ चालू किए जाएंगे। जानकारी अनुसार जिला वनोपज सहकारी संघ ने जो लक्ष्य रखा है उसके अनुसार अनूपपुर सहकारी समिति में 2600 मानक बोरा का, जैतहरी में 1700, वेंकटनगर 3100, कोतमा 5300, बिजुरी 2500, बसनिहा 1200, मझगवां 3600, बेनीबारी 2200 का लक्ष्य तय किया गया है। बताया गया पिछले वर्ष प्रतिमानक बोरा का मूल्य 1250 रुपए रखा गया था, जो इस चुनावी वर्ष बढ़ाकर 200 प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। बताया गया जिले में समिति कोतमा, बिजुरी,मझगवां, वेंकटनगर और जैतहरी का पत्ता बेहतर प्राप्त होता है जबकि बेनीबारी, बसनिहा में मौसम ठण्डा रहने से अच्छी क्वालिटी का पत्ता नहीं मिल पाता। बताया गया वनांचल में रहने वालो के लिए तेंदूपत्ता आए का बडा जरिया होता है। इनके आर्थिक हालातों को सुधारने के लिए शासन ने इनकी मजदूरी की दर 1250 से बढ़ाकर 2 हजार रुपए प्रति मानक बोरा कर दी है।
   


दम तोड़ रही औद्योगिक विकास परियोजना, दो साल बाद भी बिजली पानी की नहीं सुविधा

कागजों में निवेशकों को स्थापित करने की चल रही योजना
अनूपपुर जिले के 43 औद्योगिक निवेशकों को अपने उद्यम संचालन के लिए अभी कुछ समय का और इंतजार करना होगा। जिले के प्रभारी मंत्री के सपने में शामिल अनूपपुर औद्योगिक विकास परियोजना क्षेत्र में बिजली और पानी की सुविधा नहीं उपलब्ध कराई गई है। बिजली के लिए टेंडर तो जारी हो गए लेकिन अबतक बिजली विभाग से अनुबंध नहीं हुए हैं। जबकि पानी की सुविधा के लिए प्रस्तावों से बाहर कोई कार्यनहीं कराया गया है। वहीं पूर्व में ऑनलाईन आमंत्रित किए गए आवेदकों के प्लाट तक सड़क बनाने का कार्य जारी है। यानि 22 एकड़ में प्रस्तावित 107 प्रस्तावित भूखंड में मात्र 44 भूखंड तैयार हुए हैं, शेष 63 भूखंड पिछले दो सालों बाद भी निर्माणाधीन है। इन 22 एकड़ की आवंटित जमीन में शामिल 5 एकड़ जमीन का मामला भी विभाग दो सालों बाद भी नहीं सुलझ सकी। जिसके कारण लाखों- करोड़ों के बैंक लोन लेकर निवेश के इंजतार में बैठे निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच आई है। उद्योग विभाग का कहना है कि औद्योगिक एरिया में बिजली और पानी की कोई सुविधा नहीं है। बिजली के लिए प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है बिजली विभाग द्वारा सब स्टेशन स्थापित किया जाना है, वहीं पानी की सुविधाओं के लिए प्रक्रिया पूर्ण कराई जाएगी। फिलहाल सड़क और भूखंड तैयार की प्रक्रिया पूर्ण कराई जा रही है। वहीं विभाग का कहना है कि पहले चरण के निवेशकों को जून माह तक भूखंड आवंटन करा दिए जाएंगे। शेष दूसरे चरण के लिए थोड़ा समय लगेगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी औद्योगिक एरिया को पूर्णरूपेण संचालित होने में कुछ वर्ष और लगेंगे। बिजली और पानी के कार्य चंद दिनों में पूर्ण होने वाले नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि सितम्बर 2016 में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 2 करोड़ 29 लाख 46 हजार की लागत से औद्योगिक विकास क्षेत्र के विकास की आधारशिला अनूपपुर-कोतमा मार्ग पर कदमटोला गांव में रखी थी। जिसका मुख्य उद्देश्य जिले के युवाओं को औद्योगिक विकास में भागीदारी बनाते हुए आत्मनिर्भर बनाना था। औद्योगिक विकास एरिया की स्थापना उपरांत लघु उद्योग से जुडे लगभग 107 निवेशकों को उद्योग प्लाट उपलब्ध कराकर औद्योगिक विकास को गति प्रदान कराई जाती। इसमें 5 करोड़ की अधिकतम लागत वाली योजनाओं को शामिल किया जाता, यानि अधिकतम 5 करोड़ की प्लांट मशीनरी स्थापित करने वाले उद्योग स्थापित होते। इसके लिए जिला उद्योग विभाग तथा लद्यु उद्योग निगम को जल्द ही औद्योगिक एरिया का विकास कर प्लाट आवंटन कर उद्यम संचालित की प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन परियोजना के दो साल बीत गए, जिले के युवाओं को उद्योग स्थापित करने का अब तक मौका नहीं मिला। इससे पूर्व भी जमीनी अड़चन और भूखंड निर्माण में बरती गई सुस्ती पर जिले के प्रभारी मंत्री संजय पाठक ने जिला योजना समिति की बैठक में औद्योगिक एरिया में 107 उद्योग स्थापना के साथ 107 निवेशकों को लाभ से वंचित किए जाने पर शासकीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को दोषी ठहराया था। साथ ही मामले में लद्यु उद्योग निगम अधिकारी और जिला उद्योग अधिकारी सहित प्रशासन को जमीनी अड़चन समाप्त करने तथा परियोजना को शीध्र आरम्भ करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब पूरा मामला पानी और बिजली के कारण अटक सा गया है।
इनका कहना है
बिजली और पानी की असुविधा है। बिजली के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं, विभाग से अनुबंध शेष हैं। सबस्टेशन निर्माण कराया जाएगा तथा पानी की भी व्यवस्था बनाई जाएगी। जून में उम्मीद है कि प्रथम चरण के निवेशकों को भूखंड आवंटन कर दिया जाएगा।
के.आर.उईके, महाप्रबंधक उद्योग विभाग अनूपपुर।


रविवार, 6 मई 2018

अनियमितता के मामले में चार शराब दुकाने सील



राजनगर 2पौराधार व बरतराई एक एक
अनूपपुर जिले में संचालित शराब दुकानों में दुकानदारों की मनमानी तथा शासन द्वारा जारी सेवा शर्तो के उल्लंधन के मामले में शनिवार 5 मई की शाम कलेक्टर के निर्देश में आबकारी विभागा की टीम ने कोतमा क्षेत्र के चार शराब दुकानों को अनियमितता के मामले में सील कर दिया है। सील हुई दुकानों में राजनगर क्षेत्र की 2 दुकानें तथा एक पौराधार व एक बरतराई ग्राम पंचायत की शामिल है, जहां आगामी दिनों कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट पर समस्त चारों दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बताया जाता है कि चारों दुकान एक ही व्यक्ति नागेन्द्र पटेल के नाम से संचालित हो रही थी। जिसमें दुकानदार ने म.प्र.मद लिपिक नियमों के विपरीत अपनी मनमानी में दुकान का संचालन कर रहा था। आबकारी विभाग के अनुसार दुकान संचालक ने लायसेंस सेवा शर्तो का उल्लंधन किया था। जिसमें नियमानुसार दुकान में ही मूल लायसेंस, साईनबोर्ड, खरीदी व ब्रिकी से सम्बंधित रजिस्टर रखना अनिवार्य होता है। लेकिन दुकानदार ने इनका पालन नहीं किया था। इसके अलावा शराब दुकान के साथ अहाता संचालन में भी अनियमितता पाई गई। साथ ही शराब के निर्देशों में शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है के प्रति लोगों को जागरूक करने कोई संवाद तक नहीं लिखे गए थे। जिसमें पूर्व में हुई शिकायत पर जांच पड़ताल में सही पाते हुए कलेक्टर के निर्देश में कार्रवाई की गई। विदित हो कि इससे पूर्व राजनगर में संचालित शराब दुकानों को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया जाता रहा है।
इनका कहना है
शराब दुकान की जांच में अनियमितता पाई गई थी। साथ ही दुकान संचालन ने लायसेंस नियमों का उल्लंधन कर नियमों के विपरीत व्यवस्थाएं अपनाई थी। जिसमें कलेक्टर के निर्देश के बाद शनिवार को चारो दुकानों का सील कर दिया गया।
अखलाक हुसैन कुरैशी, एडीओ अनूपपुर।

 

खनिज विभाग ने बिना नम्बर के दो ट्रेक्टर को रेत परिवहन करते किया जब्त



अनूपपुर। कोतमा विकासखंड में नदियों व नालों से अवैध तरीके से रेत उत्खनन और परिवहन की लगातार शिकायत पर ६ मई की सुबह खनिज विभाग ने ग्राम बैहाटोला ग्र्राम पंचायत से दो ट्रैक्टरों को बिना किसी पर्ची परिवहन करते जब्त किया। दोनों ट्रेक्टर में लगभग 3 घन मीटर रेत लोड था। इनमें दोनों ट्रैक्टर बिना नम्बर के पाए गए। खनिज निरीक्षक राहुल शांडिल्य के अनुसार शिकायत पर जांच के दौरान बिना नम्बर के पहला ट्रैक्टर का वाहन मालिक गणेश प्रसाद चंद्रा बैहाटोला तथा दूसरा ट्रैक्टर मालिक रेशमलाल पनिका बैहाटोला पाया गया। दोनों ट्रैक्टर को जब्त कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए बिजुरी थाने की अभिरक्षा में दिया गया है। वहीं प्रकरण दर्ज कर कलेक्टर न्यायलय में प्रेषित किया जाएगा। कार्रवाई के दौरान खनिज अधिकारी राहुल शांडिल्य, सिपाही रामभुवन बागरी, मुन्ना सिंह, हरि सिंह शामिल रहे।

भीषण गर्मी: प्राइमरी कक्षा तक की छुट्टी, 6वीं से 12वीं तक की कक्षाएं यथावत

अनूपपु्र। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले मे गर्मी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। वही इस भीषण गर्मी से विद्यालय के ...