अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के थाना रामनगर क्षेत्र के एक स्कूल में पढ़ने वाली 9 नाबालिग छात्राओं के साथ लैंगिक अपराध के मामले में आरोपी शिक्षक को तृतीय अपर सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) श्रीकृष्ण डागलिया ने दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजक हेमंत अग्रवाल ने शनिवार को बताया कि आरोपी शिक्षक को पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रत्येक मामले में अलग-अलग 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। इसके अतिरिक्त बीएनएस के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई। अलग-अलग धाराओं में कुल सजा 45 वर्ष तथा अर्थदंड 90 हजार रुपये निर्धारित किया गया था। हालांकि, आरोपी की आयु को देखते हुए न्यायालय ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया। इस प्रकार आरोपी को कुल 14 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, घटना 20 अगस्त 2024 से 23 अगस्त 2024 के बीच की है। इस दौरान आरोपी शिक्षक के विरुद्ध स्कूल में अध्ययनरत 12 वर्ष से कम आयु की नाबालिग छात्राओं के साथ बुरी नीयत से छेड़छाड़ करने की शिकायत थाना रामनगर में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में मामले की विवेचना की गई। सभी नाबालिग छात्राओं के बयान दर्ज किए गए और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए। विवेचना पूर्ण होने के बाद विशेष न्यायालय पॉक्सो में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में नाबालिग छात्राओं ने अपने साथ हुई घटनाओं के संबंध में साक्ष्य दिए। दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने आरोपी शिक्षक को दोषी पाते हुए कठोर दंड सुनाया। न्यायालय ने समाज में बढ़ रहे इस प्रकार के अपराधों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला दिया।

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