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रविवार, 12 जुलाई 2026

इंगाराजविवि के मॉडल ट्राइबल स्कूल में 9वीं–12वीं शुरू करने पर उठे सवाल, बिना मान्यता छात्रों के भविष्य पर संकट की आशंका

अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक परिसर में संचालित मॉडल ट्राइबल स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं प्रारंभ करने की मांग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में विद्यालय के पास केवल कक्षा 1 से 8 तक संचालन की वैधानिक अनुमति है। ऐसे में बिना आवश्यक स्वीकृतियों और बोर्ड संबद्धता के उच्च कक्षाएं शुरू करना जनजातीय विद्यार्थियों के भविष्य को जोखिम में डाल सकता है। विद्यालय का यू-डाइस कोड 23471109607 है और यह विद्यालय श्रेणी-2 (प्राथमिक सह उच्च प्राथमिक) तथा प्रबंधन श्रेणी-101 (अन्य केंद्रीय शासकीय विद्यालय) के अंतर्गत पंजीकृत है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार सत्र 2026-27 में विद्यालय में केवल कक्षा 1 से 8 तक ही विधिसम्मत रूप से शिक्षण संचालित किया जा सकता है।

बताया गया है कि वर्तमान प्रभारी कुलपति प्रो. ए. के. शुक्ला ने अप्रैल 2026 में कार्यभार संभाला है। वहीं कक्षा 9वीं से 12वीं तक संचालन के लिए शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से नियमित शिक्षकीय पदों, बजट और संस्थागत स्वीकृतियों की आवश्यकता है, जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं।

बोर्ड संबद्धता के बिना नहीं चल सकतीं उच्च कक्षाएं

जानकारों के अनुसार विद्यालय को अभी तक सीबीएसई का संबद्धता क्रमांक, स्कूल कोड अथवा आवेदन कोड प्राप्त नहीं हुआ है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से भी मान्यता नहीं मिली है। वर्तमान स्थिति में विद्यालय किसी भी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध नहीं है। 

सीबीएसई संबद्धता उपनियम-2018 के अनुसार औपचारिक संबद्धता प्राप्त किए बिना कक्षा 9, 10, 11 और 12 का संचालन नहीं किया जा सकता। साथ ही कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए विद्यार्थी का कक्षा 9 किसी मान्यता प्राप्त एवं संबद्ध विद्यालय से अध्ययन करना अनिवार्य है। यही व्यवस्था माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश में भी लागू है। सत्र 2026-27 के लिए संबद्धता आवेदन की समय-सीमा भी समाप्त हो चुकी है।

राजनीति बनाम विद्यार्थियों का भविष्य

मामले को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ राजनीतिक लोग जनजातीय छात्रों के हितों की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए 9वीं से 12वीं कक्षाएं तत्काल शुरू कराने का दबाव बना रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए कक्षाएं शुरू की जाती हैं तो विद्यार्थियों के पंजीयन, बोर्ड परीक्षा और प्रमाणपत्र पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

मंत्रालय की स्वीकृति और अलग बजट आवश्यक

सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन संचालित होता है, जबकि विद्यालयी शिक्षा के लिए अलग प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था लागू होती है। कक्षा 8 से ऊपर के संचालन हेतु अलग पद संरचना (सेटअप), वित्तीय स्वीकृति और आवश्यक बजट की मंजूरी अनिवार्य है। बिना स्वीकृति अन्य विभाग से वित्तीय सहायता लेने पर ऑडिट संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

सीबीएसई के न्यूनतम मानदंड भी पूरे करना जरूरी

कक्षा 9 से 12 तक संचालन के लिए सीबीएसई के निर्धारित मानकों के अनुसार विद्यालय में पर्याप्त कक्षाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, गणित प्रयोगशाला, स्वच्छ पेयजल, पृथक शौचालय, चिकित्सा कक्ष, दिव्यांगजन के लिए रैंप, प्रशिक्षित टीजीटी और पीजीटी शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, कला एवं संगीत शिक्षक, परामर्शदाता, शारीरिक शिक्षा शिक्षक तथा आवासीय विद्यालय होने की स्थिति में छात्रावास अधीक्षक जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं। 

विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी प्रक्रियाओं, मंत्रालयीय स्वीकृतियों और बोर्ड संबद्धता को पूरा करने में पर्याप्त समय लग सकता है। ऐसे में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कक्षा 9 से 12 का संचालन छात्रों के हित में माना जाएगा।


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