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बुधवार, 8 जुलाई 2026

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त रखने और विधायी संरक्षण देने की मांग, शिक्षक संघ ने सांसद को सौंपा ज्ञापन

सांसद ने कहा: शिक्षकों की इस न्यायोचित बात और भावनाओं को पहुँचाने के साथ सांसद सत्र के दौरान उठाऊंगी 

अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ (सम्बद्ध: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ) ने के शिक्षकों ने बुधवार को शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष संजय निगम के नेतृत्व सांसद हिमांद्री सिंह के निज निवास राजेन्द्रग्राम पहुंच कर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त रखने और विधायी संरक्षण देने की मांग का ज्ञापन सौंपा। उन्होंने प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री, भारत सरकार से इस गंभीर विषय पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। 

क्या है मुख्य मामला?

ज्ञापन में बताया गया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 23 अगस्त 2010 को शिक्षक पात्रता परीक्षा संबंधी अधिसूचना जारी की गई थी। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 29 मई 2026 को दिए गए एक निर्णय के बाद देश भर के लाखों शिक्षकों में असुरक्षा और चिंता की भावना व्याप्त हो गई है। इस निर्णय से वर्ष 2010 से पूर्व विधिवत नियुक्त हुए उन शिक्षकों के सेवाधिकारों और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिन्होंने दशकों से देश के राष्ट्र निर्माण और शिक्षा व्यवस्था में अमूल्य योगदान दिया है।

संगठन के प्रमुख तर्क

 संगठन का मानना है कि कोई भी नियम या अधिसूचना सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में हो चुकी नियुक्तियों पर बाद में तय किए गए पात्रता मानदंडों को थोपना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विरुद्ध है। दशकों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को इस मोड़ पर अनिश्चितता में डालना पूरी शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित करेगा।

प्रमुख माँगें

 शिक्षक पात्रता परीक्षा से स्थायी मुक्ति: 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी (TET) की अनिवार्यता से पूर्णतः व स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। ऐसे अनुभवी शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। आवश्यकता होने पर संसद के आगामी मानसून सत्र में विशेष प्रावधान या विधायी संशोधन लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत प्रदान की जाए। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों के बीच व्याप्त असमंजस की स्थिति को तुरंत दूर किया जाए।

सांसद हिमांद्री सिंह ने शिक्षक प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि वे इस विषय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक शिक्षकों की इस न्यायोचित बात और भावनाओं को अवश्य पहुँचाने के साथ सांसद सत्र के दौरान उठाऊंगी। 


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